Wednesday, 17 July 2013

माई...!! हम भुखे रहती... त जीयत रहती...


माई...!! हम भुखे रहती... त जीयत रहती...
     सरकारी खाना खा के मर गईनी....
     हम तोहार दुध के कर्ज ना चुका पईनी... !!
            गईल रहनी पढ़े... ढ़ाई आखर प्रेम के...
            लील गईल हमरा के... जहर इ तेल के...
            छुटल तोहर अंचरा के साथ... बाबु के हाथ...
            जिनगी के लडाई हम हार गईनी...
            हम तोहार दुध के कर्ज ना चुका पईनी... !!
      मरलो पर चैन नईखे...  देख राजनीति के खेल...
      तीर करेजा चीर देहलक... कमल भी हो गईल फ़ेल...
      अब लालटेनो इ तेल में जर ना पाई...
 एकरो हाथ के साथ छूट जाई..
       तोहरो दूध इ जालिमन के माफ़ ना करी...
       अब त उपरे वाल इंसाफ़ करी.....
       हम ले के आयेम दोसर जनम...
       करब सब के किस्सा खतम... इ खा के कसम
हम सरकारी खाना ना खाईब...
     तबे तोहार दूध के कर्ज चुका पाईब... ! 

Sunday, 2 June 2013

मैं माओवादी हूं... ए.के. फ़ोर्टी सेवेन रखता हूं...

मैं माओवादी हूं... ए.के. फ़ोर्टी सेवेन रखता हूं...

रहने को घर नहीं... सोने को बिस्तर नहीं...
खाने को अनाज़ नहीं... मैं जंगल दर जंगल भटकता हूं...
मैं माओवादी हूं... ए.के. फ़ोर्टी सेवेन रखता हूं...

     शांती दूत हूं मैं...  मिट्टी का सपूत हूं मैं ...
     गरीबो का मसीहा हूं... उनके हक के लिए लड़ता हूं...
     मैं माओवादी हूं... ए.के. फ़ोर्टी सेवेन रखता हूं...

कोई भूमि मेरा छुये मंजूर नहीं... अब दिल्ली दूर नहीं...
हर तरक्की रोक दूंगा,बोलोगे तो ठोक दूंगा.. बस अपनी बात ही सुनता हूं.. 
मैं माओवादी हूं... ए.के. फ़ोर्टी सेवेन रखता हूं...